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Sunday, July 18, 2021

Supreme Court Lays Foundation For FASTER: Fast And Secure Transmission Of Electronic Record For Speedier Execution Of Orders

 Supreme Court Lays Foundation For FASTER: Fast And Secure Transmission Of Electronic Record For Speedier Execution Of Orders  


The Supreme Court while hearing a Suo Moto Writ Petition on “Delay In the release of Convicts After Grant of Bail '' acknowledged the need for speedier delivery of orders for Execution and passed a direction to the Registry with respect to the same.


Learned Solicitor General, Mr Mehta suggested that orders uploaded on Court Websites can also be designated as “Official Orders” to effectuate quick release. A brief submission was also made highlighting the need for “authentic orders” by the Jail authorities.


A Full Bench of Chief Justice NV Ramana, Justice Nageswara Rao and Justice AS Bopanna, while hearing the matter today, said,


“In this age of Information and Communication Technology, we are still looking at the skies for pigeons to communicate orders”


Court shared its deliberation on rolling out a Scheme “FASTER: Fast and Secure Transmission of Electronic Record”


The Secretary-General, Supreme Court has been directed to submit a detailed report within two weeks.


The bench aims at revolutionising transmission of Court orders, through credible channels, so that the implementation of it takes lesser time, benefitting persons enlarged on Bail.

Sunday, November 8, 2020

How to get success

It is very important to have a focused mind to achieve success.  It is also important to have a definite goal as well.  If we study the lives of successful people, we find that they had chosen a path,  one  definite goal and had tried to achieve that goal with a focused mind and eventually got success.  Now-a-days this property is lacking in students.  Sometimes they prepare for a competition and sometimes for other which causes hindrances in their  success   .  They oscillate between one thought to another  and  failed  to set definite goal. Students should set a goal and try with a focused mind to achieve the same goal.  It is not possible that you  concentrate on one goal and do not succeed.  To know the  benefits of setting a goal, you must read the book "Scholar Gypsy" written by Matthew Arnold, "The Alchemist" written by Brazilian author Paulo Coelho.

rmrprakash@gmail.com


Tuesday, October 27, 2020

विजयादशमी

 नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा के बाद विजयादशमी का त्योहार आता है । यह  आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को हासिल की गई महत्वपूर्ण विजय का यह प्रतीक पर्व है । भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।उस दिन राम ने दस मुख वाले नायक  रावण को हराया था , इसलिए यह दशहरा है ।  यह हमारी शक्ति और विजय , दोनों का उत्सव है । यह राम के विजय के साथ शक्ति की उपासना का भी पर्व है । राम हमारे मिथक पुरुष हैं और मिथक का ऐतिहासिक उपयोग  भी होता है । यह जो राम है , वह हमारी संस्कृति के प्रतीक इस अर्थ में हैं कि समय- समय पर उनका रूप विकसित या परिवर्तित होता रहा है । यानी हमारी संस्कृति में जो कुछ भी शक्तिशाली , जो कुछ भी शीलवान और जो कुछ भी सुंदर है , जिसे आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने शक्ति , शील और सौंदर्य का समष्टि  रूप कहा है , राम उनके प्रतीक है । 

राम ईश्वर भी है, राम अवतार भी है ।वह समाज के रक्षक के साथ ही असंख्य दीनों के पालन हार भी बने। उन्होंने स्त्री को सम्मान दिया,  वानरों को नर  बनाया ।उन्होंने स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया राम स्वयं सूर्य होकर दीपकों के समान जले और असंख्य दीपकों को उन्होंने सूर्य बना दिया।


Monday, October 26, 2020

तुम माँ हो

 


तुम माँ हो।
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हर रोज कुछ सहेजने की कोशिश करता हूं 
कुछ लिखने की कोशिश करता हूं
तुम्हारी असीम अतलता में उतरने की कोशिश करता हूं।
तुम्हारा एहसास अब भी मेरे साथ है
वे बीते वक्त के साए अब भी मेरे साथ हैं
 यादों की खुशबू अब भी मेरे साथ है।
 कठिन है निराकार को आकार देना
निःशब्द को शब्द देना ।
 सामर्थ्य नहीं मेरा कि तुम्हें शब्दों में कैद कर दूँ
असीमित को मैं  सीमित कर दूँ 
स्वार्थ के लिए रचनाओं में उपमित कर दूँ
 तुम असीम हो
 तुम उपमा रहित हो
तुम आराध्य हो 
हारती है एक  लेखनी हर रोज 
जाया होती है एक कोशिश हर रोज
मगर बढ़ता है दुआओं का असर हर रोज।
तुम असीम हो, निराकार हो , तुम  माँ हो। 

अशोक मिश्र
वाराणसी
9547608041

Saturday, October 24, 2020

विकल्प हीन राजनीति

कभी भारतीय राजनीति में एक से बढ़कर एक दिग्गज प्रगतिशील  ईमानदार नेता हुआ करते थे। वे राजनीति करने के साथ-साथ राजनीति को समझते भी थे। विदेश नीति और कूटनीति में माहिर होने के साथ-साथ एक अर्थव्यवस्था कैसे कार्य करती है का समग्र ज्ञान रखते थे। एक राजनेता जनता का प्रतिनिधि होता है और उसके द्वारा दिए गए किसी भी बयान से जनता प्रभावित होती है। एक गलत बयान से  लाखों करोड़ों लोगों के दिमाग में गलत अवधारणा बनती है। गलत बयान देकर जाति और धर्म के आधार पर लोगों को बांटना कतई किसी राष्ट्र के हित में नहीं है। 

यदि बिहार के परिप्रेक्ष्य में इसको देखें तो वहां की जनता आज विकल्पहीन हो गई है। एक भी ऐसा चेहरा नहीं है जिसे कहा जा सके कि वह सही मायने में राजनेता है और राजनीति का सही ज्ञान  रखता है। यदि आपको कहा जाए कि कई अच्छे लोगों में से एक अच्छा व्यक्ति को चुने तो यह आपके लिए बहुत कठिन कार्य नहीं होगा। लेकिन जब आपसे कहा जाए कई बुरे लोगों में से एक कम बुरा व्यक्ति को चुने तो यह निश्चित रूप से चुनौती पूर्ण ही नहीं, बल्कि आपके के लिए किंकर्तव्यविमूढ़ वाली स्थिति होगी।

 अनाप-शनाप बयान देकर, काल्पनिक बातें करके जनता को बरगलाना भ्रमित करना कतई ठीक नहीं है। चुनावी लाभ के लिए जैसा कि भारतीय राजनीति में होता आय है जनता के समक्ष एक ऐसा एजेंडा प्रस्तुत करना जिसका कार्यान्वयन संभव नहीं हो नैतिक रूप से गलत है।

एक पार्टी कहती है, यदि हमारी सरकार बनी तो हम 10 लाख रोजगार का सृजन करेंगे उस पर दूसरी पार्टी का बयान आता है “पैसावा कहां से लाएंगे”। उसके तुरंत बाद उन्हें लगता है उस बयान का राजनीतिक लाभ विपक्ष को मिल रहा है तो वे तुरंत अपने बयान से पलट जाते हैं और उससे कहीं अधिक रोजगार सृजन का भ्रामक  आंकड़ा प्रस्तुत कर युवाओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब उनके पास पर्याप्त अवसर था अपने पुराने वादों को पूरा करने का तब उन्होंने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। आज फिर एक बार जनता को अपनी कल्पित बातों से बहलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस स्थिति के लिए पार्टी स्वयं जिम्मेदार है। या तो आप अपने किए वादे को पूरा कीजिए या जनता के सामने  सच्चाई रखिए।

 वैसे लोग जिन्हें अर्थव्यवस्था का ज्ञान नहीं है, जब जनता  के समक्ष अपना आर्थिक ज्ञान बघारते हैं तब वे राजनेता कम विदूषक ज्यादा लगते हैं। लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनता का क्या दुख दर्द हैं उनको समझा जाना चाहिए, न की अपनी ही बात जनता को सुनाते रहना चाहिए। भारतीय राजनीति में एक ट्रेंड जोर पकड़ता जा रहा है कि बस अपनी ही बात सुनाया जाए जनता की बात न सुना जाए। इस प्रकार का एकतरफा संवाद एक प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। बिहार में फरवरी 2019 से बेरोजगारी की दर 10 फीसदी है युवाओं में यह 55 फीसदी है। नियोजित लोगों में 87 फ़ीसदी के पास नियमित वेतन वाली नौकरी नहीं है। मनरेगा के तहत दो करोड़ परिवारों ने पंजीयन करवाया है, मगर सिर्फ 36.5 फीसदी को काम मिला। बिहार के लाखों युवा, मजदूर राज्य में रोजगार की व्यवस्था न हो पाने के कारण पलायन करने के लिए मजबूर है ।इस पलायन पर वर्षों से राजनीति होती आई है लेकिन किसी न किसी बहाने इस बात को टाल दिया जाता है और अन्य मुद्दों को आगे करके एक भ्रम की स्थिति पैदा की जाती है ताकि लोग असल मुद्दे को भूल जाए।  लाख दावों के बावजूद बिहार की शिक्षा व्यवस्था अभी भी लचर है। अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है ।डॉक्टरों की संख्या निर्धारित संख्या से बहुत ही कम है ।कुछ इलाकों को छोड़कर सड़कों की स्थिति भी कुछ अच्छी नहीं है।किसान बदहाल स्थिति में है बिहार में कृषि के लिए अपने कुल खर्च का महज 3.5 फीसदी आवंटित किया है जो कि देश में सबसे न्यूनतम है और सभी राज्यों का औसत 7.1  है । 42.5 फीसद कृषक परिवार कर्जदार है। 

यदि हम उम्मीद करते हैं कि इसके जाने के बाद और उसके आने के बाद स्थिति बदलेगी तो यह सरासर गलत है ।स्थिति यथावत रहने वाली है और हो सके तो इस से भी बदतर स्थिति का सामना करने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। तथ्य और सच्चाई ना कोई पार्टी सामने रख रही है और ना ही जनता समझने की कोशिश कर रही है बिहार का वोट जातीय समीकरणों पर आधारित है। राष्ट्रीय और विकास के मुद्दे हमेशा गौड़ हो जाते हैं जातीय समीकरणों के समक्ष ।

कुछ भी हो इस तरह की विकल्प हीनता की स्थिति किसी की व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है और आने वाला समय हमारे लिए और कठिन होने वाला है।  


असम के जननायक ज़ुबीन गर्ग: एक कलाकार जो सिर्फ़ आवाज़ नहीं, असम की पहचान थे#

 #असम के जननायक ज़ुबीन गर्ग: एक कलाकार जो सिर्फ़ आवाज़ नहीं, असम की पहचान थे# असम के प्रिय गायक, संगीतकार और सामाजिक कार्यकर्ता ज़ुबीन गर्ग ...