#असम के जननायक ज़ुबीन गर्ग: एक कलाकार जो सिर्फ़ आवाज़ नहीं, असम की पहचान थे#
असम के प्रिय गायक, संगीतकार और सामाजिक कार्यकर्ता ज़ुबीन गर्ग का निधन सिर्फ़ एक कलाकार की विदाई नहीं है, बल्कि असम की संस्कृति, चेतना और सामाजिक-राजनीतिक जीवन से एक युग का अंत है। उनके निधन के बाद उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि ज़ुबीन सिर्फ़ एक लोकप्रिय कलाकार नहीं, बल्कि असम की आत्मा थे। उनकी विरासत संगीत से कहीं ज़्यादा गहरी थी।
#संगीत से परे, एक जन नायक
ज़ुबीन गर्ग ने संगीत के माध्यम से लोगों के दिलों में जगह बनाई, लेकिन उनकी असली पहचान उनके निर्भीक और सामाजिक व्यक्तित्व में निहित थी। उन्होंने धर्म और भाषा की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ने का काम किया। उनकी सबसे बड़ी शक्ति उनकी बेबाकी थी। जुबीन ने कभी भी सत्ता से लोहा लेने में संकोच नहीं किया। वे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) जैसे विवादास्पद मुद्दों पर खुलकर बोले और उनका नारा, "मोई अहोमिया, मोर धर्मो अहो" (मैं असमिया हूँ, असम ही मेरा धर्म है), असम के लोगों के लिए आत्म-सम्मान और एकता का प्रतीक बन गया।
#लोगों के दिलों पर राज करने वाले 'किंग'
जुबीन की लोकप्रियता का राज सिर्फ़ उनके गीतों में नहीं था, बल्कि उनके मानवीय स्वभाव में छिपा था। वह अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा गरीबों और ज़रूरतमंदों पर खर्च कर देते थे। उन्होंने अपने घर को कोविड सेंटर में बदल दिया था, 15 बच्चों को गोद लिया और सामाजिक कार्यों जैसे नशा-विरोधी अभियानों और जानवरों के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम किया। यही वजह है कि सड़क किनारे के ठेले वाले से लेकर बड़े-बड़े बुद्धिजीवी तक, हर किसी के पास उनसे जुड़ी कोई न कोई व्यक्तिगत कहानी है।
बॉलीवुड में मिली अपार सफलता के बाद भी जुबीन का वापस असम लौट आना उनके व्यक्तित्व का एक अहम पहलू था। उन्होंने अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि वे मुंबई की अराजकता में राजा की तरह नहीं रह सकते, जबकि असम में वे राजा की तरह जिएंगे और राजा की तरह ही मरेंगे। उनके निधन के बाद उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया कि असम के लोगों ने अपने इस बादशाह को निराश नहीं किया।
#एक अमर विरासत
जुबीन गर्ग का निधन एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा ज़िंदा रहेगी। उन्होंने अपने गीतों, साहस और प्रेम से जो मशाल जलाई है, वह असम को हमेशा सही राह दिखाती रहेगी। उनका जीवन यह संदेश देता है कि एक सच्चा कलाकार अपनी कला से परे जाकर समाज में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।