नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा के बाद विजयादशमी का त्योहार आता है । यह आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को हासिल की गई महत्वपूर्ण विजय का यह प्रतीक पर्व है । भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।उस दिन राम ने दस मुख वाले नायक रावण को हराया था , इसलिए यह दशहरा है । यह हमारी शक्ति और विजय , दोनों का उत्सव है । यह राम के विजय के साथ शक्ति की उपासना का भी पर्व है । राम हमारे मिथक पुरुष हैं और मिथक का ऐतिहासिक उपयोग भी होता है । यह जो राम है , वह हमारी संस्कृति के प्रतीक इस अर्थ में हैं कि समय- समय पर उनका रूप विकसित या परिवर्तित होता रहा है । यानी हमारी संस्कृति में जो कुछ भी शक्तिशाली , जो कुछ भी शीलवान और जो कुछ भी सुंदर है , जिसे आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने शक्ति , शील और सौंदर्य का समष्टि रूप कहा है , राम उनके प्रतीक है ।
राम ईश्वर भी है, राम अवतार भी है ।वह समाज के रक्षक के साथ ही असंख्य दीनों के पालन हार भी बने। उन्होंने स्त्री को सम्मान दिया, वानरों को नर बनाया ।उन्होंने स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया राम स्वयं सूर्य होकर दीपकों के समान जले और असंख्य दीपकों को उन्होंने सूर्य बना दिया।
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