Followers

Monday, September 14, 2020

सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर इतना विवाद क्यों?

 

 सुशांत सिंह राजपूत की मौत  पर इतना  विवाद क्यों?

-------------------------------------------------------------

किसी दो राजनीतिक दलों में वैचारिक मतभेद हो सकता है, लेकिन जहां सवाल राष्ट्र के हित का हो वहां पर राष्ट्र सर्वोपरि होना चाहिए है। अपराधी चाहे कोई भी हो समाज और राष्ट्र के लिए हानिकारक ही होता है। अपराधी का पहचान करने उसके द्वारा किए गए अपराध की सजा दिलाने में हमें एकमत होने की आवश्यकता है। हां, यह जरूर सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी निर्दोष को सजा न मिले।  राजनीतिक  स्वार्थ पूर्ति के लिए किसी अपराध में लिप्त व्यक्ति का  साथ देना या उस पर कार्रवाई न करने पर किसी के द्वारा टिप्पणी करने पर उसके विरुद्ध बदले की कार्रवाई करना राजनीतिक और नैतिक मूल्यों में गिरावट के रूप में देखा जा सकता है। मीडिया को भी इस संबंध में जिम्मेदार होने की आवश्यकता है। हमारे संघीय ढांचे में संविधान द्वारा प्रदत्त अनेक प्रावधान न्याय को सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध है। हमें इन प्रावधानों में विश्वास बनाए रखना चाहिए। किसी भी विषय पर बोलने लिखने से पहले सत्यता की परख की जानी चहिये। महज, व्यसायिक लाभ के लिए कुछ भी बोला एवं लिखा जाना राष्ट्र और समाज दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। 

 जनतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वश्रेष्ठ होती है। जनता को किसी भी मामले का सत्य जानने का पूरा अधिकार है। जनता की ऐसी इच्छा को दबाना एक तरह से निरंकुशता की पहचान है।  इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जिस किसी भी पार्टी ने अपने आप को जनता से ऊपर समझा और जाना उसका कालांतर में विघटन अवश्य ही हुआ। महाराष्ट्र सरकार द्वारा विगत कुछ दिनों में जो कुछ भी किया जा रहा है उससे न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। जनता चाहती है तो जांच होने देनी चाहिए, जनता की मांग है कि किसी विषय पर खुलकर बहस हो तो उसे होने देना चाहिए। आजकल यह देखा जा रहा कि पार्टी और उसके नेता अपने आपको जनता से ऊपर समझने लगते हैं। चुनाव जीतने के बाद,  खास करके सत्ता में आने के बाद जनता उनके लिए गौण हो जाती है। केंद्र कुछ बोलता है राज्य सरकार कुछ करती हैं जो कि संघीय ढांचे के विरुद्ध है ।कोई सी भी पार्टी केंद्र में हो सकती है ,कोई भी पार्टी राज्य में हो सकती है, जहां मुद्दा विकास का हो राष्ट्र हित का हो सभी दलों को राजनीतिक मत -भेद को भुला कर एकजुटता से  राष्ट्र के निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए ।


असम के जननायक ज़ुबीन गर्ग: एक कलाकार जो सिर्फ़ आवाज़ नहीं, असम की पहचान थे#

 #असम के जननायक ज़ुबीन गर्ग: एक कलाकार जो सिर्फ़ आवाज़ नहीं, असम की पहचान थे# असम के प्रिय गायक, संगीतकार और सामाजिक कार्यकर्ता ज़ुबीन गर्ग ...