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Sunday, September 19, 2021

भाषा संप्रेषण

भाषा संप्रेषण

आर.पी मिश्रा

भाषा संप्रेषण का साधन है अर्थात दो व्यक्ति भाषा के माध्यम से विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। जब व्यक्ति माइक का इस्तेमाल करता है; तो संप्रेषण का क्षेत्र बढ़ जाता है। जब व्यक्ति लेखन का उपयोग करता है, तो उसका पाठक वर्ग क्षेत्र और काल की दृष्टि से विस्तृत हो जाता है। इस तरह विज्ञान में उन्नति और प्रौद्योगिकी के विकास कारण संप्रेषण का विस्तार होता गया। हम जिन माध्यमों से संप्रेषण करते हैं उन्हें संचार साधन कहते हैं और वह संप्रेषण भी आधुनिक संदर्भ में संचार कहा जाता है। यह रोचक तथ्य है कि अंग्रेजी में संप्रेषण, संचार दोनों के लिए एक ही शब्द है-Communication. हिन्दी में भाषिक व्यापार संप्रेषण है, संप्रेषण के साधनों के संदर्भ में भौतिक संदेश संप्रेषण संचार है।
संप्रेषण के तीन पक्ष हैं-संप्रेषित करने वाला (वक्ता या लेखक) , संदेश जो संप्रेषित किया जाता है और संदेश ग्रहण करने वाला (श्रोता या पाठक) । भाषा की दृष्टि से संदेश की संप्रेषणीयता का सवाल आता है। उस दृष्टि से भाषा एक कोड है, अर्थ की वाहिका है। अगर कोड त्रुटिपूर्ण हो तो संदेश संप्रेषित नहीं होगा। इस कारण शुद्ध उच्चारण, सही लेखन, उपयुक्त शब्दों का प्रयोग, व्याकरण सम्मत वाक्यों की रचना संप्रेषण के लिए आवश्यक है। यह संप्रेषण का भाषा वैज्ञानिक पक्ष है।
  भाषिक संप्रेषण में दोनों पक्षों में परस्परता एक प्रमुख लक्षण है। इस कारण वक्ता और श्रोता; या लेखक और पाठक यह सुनिश्चित करते हैं कि संदेश उचित ढंग से संप्रेषित हो रहा है या नहीं। संप्रेषण को साधना एक अनिवार्य कौशल है, जिसकी झलक संप्रेषण की स्थितियों में देखी जा सकती है। संप्रेषण के औपचारिक संदर्भ है जैसे पत्र लेखन, भाषण, साक्षात्कार कार्यालय की बैठक आदि। उन संदर्भों में विचारों के संप्रेषण को औपचारिक रूप में निश्चित किया गया है। जैसे पत्र लेखन में सम्बोधन, विषय प्रवर्तन, स्वलेख, भेजने वाला का पता आदि लेखन को संदेश की दृष्टि से सुनिश्चितता प्रदान करते हैं। इस तरह विविध विधाओं की भाषाएँ शब्दावली, अभिव्यक्तियों आदि विधागत भाषिक अभिलक्षण हैं, जो संप्रेषणीयता सुनिश्चित करते हैं।
संचार का संदर्भ भौतिक साधनों से है। आधुनिक युग में दूर संचार, उपग्रह संचार, इंटरनेट आदि साधन विकसित हुए हैं, जिनसे संप्रेषण के नये आयाम खुले हैं। टेलीकांफ्रेंसिंग ( teleconferencing) एक नया संप्रेषण है, जिसमें विश्व भर के विद्वान पूरी परस्परता के साथ विचार-विमर्श में भाग ले सकते हैं। यह भौतिक संप्रेषण के कारण ही संभव हुआ है।


  जन संचार (mass communication) उधार-अनुवाद को प्रक्रिया से बना शब्द है। वास्तव में यह संप्रेषण का एक नया आयाम है जिसमें पूरा समाज संदेश देने और लेने का काम करता है। रेडियो, पत्रकारिता, टेलीविज़न आदि में परस्परता के अभाव में भी लोगों की व्यापक प्रतिभागिता रहती है। वैसे संचार साधनों के विकास के कारण इनमें परस्परता भी बढ़ी है। जन संचार ने इस बदलती परिस्थिति में कई नई विधाओं को भी जन्म दिया है। जन संचार के साधन केवल सूचनाओं का ही प्रसारण नहीं करते, बल्कि वैचारिक धरातल पर भी समाज दूसरे समाजों को अपने संदेश प्रभावित कर सकते हैं। इसे लोग संस्कृति पर प्रभाव के रूप में देखते हैं और इसकी उपादेयता या अवांछनीयता के बारे चिंताशील है।





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