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Wednesday, September 22, 2021

सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (SEL) क्या है?

सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (SEL) क्या है?


   भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (२०२०) में सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (एसईएल) को शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू बताया गया है।सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (SEL) मानव विकास, स्वस्थ संबंध बनाने, स्वयं और सामाजिक जागरूकता रखने, समस्याओं को सुलझाने, जिम्मेदार निर्णय लेने और अकादमिक  लर्निंग के लिए बुनियादी आवश्यकता है।  सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (एसईएल) के प्रमुख तत्वों में सहानुभूति (empathy) और मन के सिद्धांत (theory of mind) का विकास शामिल है।  'सहानुभूति' (empathy) दूसरे व्यक्ति की भावनाओं को समझने और इस बात से अवगत होने की क्षमता है कि वे उन भावनाओं को क्यों महसूस कर रहे हैं। 'मन का सिद्धांत' (theory of mind)दूसरों के इरादों, ज्ञान और विश्वासों को समझने और यह पहचानने की क्षमता है कि वे आपके अपने से अलग हो सकते हैं। शोध में पाया गया है कि अधिक सामाजिक कौशल और भावनात्मक नियमन वाले छात्रों के सफल होने की संभावना अधिक होती है।


   वास्तव में यह, शरीर विज्ञान (फिजियोलॉजी} में निहित है।  न्यूरोबायोलॉजिकल रूप से, मस्तिष्क के विभिन्न भाग जैसे प्रीफ्रंटल(prefrontal)  और फ्रंटल कॉर्टिस (frontal cortices), एमिग्डाला(amygdala), और सुपीरियर टेम्पोरल सल्कस ( superior temporal sulcus) सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (SEL) के संज्ञानात्मक तंत्र(cognitive mechanisms)में शामिल हैं।   वैज्ञानिकों ने प्रस्तावित किया है कि सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (SEL) के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारक स्वाभाविक रूप से जुड़े हुए हैं।

मस्तिष्क प्रणाली जो बुनियादी मानव व्यवहार के लिए जिम्मेदार हैं, जैसे भूख लगना, सामाजिक और भावनात्मक लर्निंग (SEL) में शामिल जटिल तंत्र के लिए पुन: उपयोग किया जा सकता है।  यह समझा सकता है कि जिस तरह से हम शारीरिक रूप से महसूस करते हैं वह दुनिया के हमारे सामाजिक-भावनात्मक मूल्यांकन को सीधे प्रभावित करता है।  

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